एजेंसी//नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सरोवर नगरी नैनीताल में बीडी पांडे जिला अस्पताल की 1.49 भूमि से जिला प्रशासन को तत्काल अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिये हैं। अदालत ने कहा कि साथ ही प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करें। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ ने नैनीताल निवासी अशोक साह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आज ये निर्देश दिये हैं। आज जिला प्रशासन की ओर से अदालत ने मामले से जुड़े दस्तावेज सौंपे गये। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में सन् 2015 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक आदेश जारी कर अस्पताल की अतिक्रमित भूमि को खाली करने के निर्देश दिये थे। कुछ अतिक्रमणकारी इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुुंच गये।
शीर्ष अदालत ने अतिक्रमणकारियों को कोई राहत नहीं दी और जिलाधिकारी के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। इसके बाद नैनीताल के जिलाधिकारी ने सभी के दावे खारिज कर दिये।
यही नहीं जिला प्रशासन की ओर से अतिक्रमणकारियों को नोटिस भी जारी किये गये लेकिन किसी ने भी भूमि को खाली नहीं किया। अंत में अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिये कि भूमि को तत्काल बलपूर्वक खाली करायें। याचिकाकर्ता की ओर से इसी साल बीडी पांडे अस्पताल में सुविधाओं को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गयी थी। इसी दौरान अस्पताल में जगह की कमी और सुविधाओं के विस्तार में असुविधा की बात सामने आये थी। स्वास्थ्य महकमे की ओर से यह भी कहा गया कि 1.49 एकड़ भूमि पर अतिक्रमणकारी काबिज हैं।
यहां बता दें कि अतिक्रमण के खिलाफ उत्तराखंड उच्च न्यायालय का रूख बेहद गंभीर है। हाल ही में उच्च न्यायालय के आदेश पर मेट्रो पोल स्थित लगभग चार एकड़ शत्रु संपत्ति पर से बिना किसी विरोध के अतिक्रमण हटाया गया।







