एजेंसी/नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऋषिकेश के आमबाग में टिहरी विस्थापितों की भूमि पर गैरकानूनी तरीके से बनाये जा रहे बहुमंजिला भवनों के मामले में सरकार और देहरादून जिला विकास प्राधिकरण (डीडीडीए) को अनुपालन रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही अन्य पक्षकारों को जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की युगलपीठ में बुधवार को विस्थापित जन कल्याण समिति की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सरकार की ओर से आज जवाबी हलफनामा दायर किया गया लेकिन अदालत इससे संतुष्ट नजर नहीं आयी।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि 2018-19 में डीडीए की ओर से कुछ लोगों को नोटिस जारी किये गये थे, लेकिन उनके खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद अदालत ने सरकार से 24 मई को जारी आदेश की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दे दिये। साथ ही सचिव आवास को पक्षकार बनाने के निर्देश दिये हैं। याचिकाकर्ता की ओर से एक जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि सरकार की ओर से टिहरी विस्थापितों को ऋषिकेश के पशुलोक के आमबाग में भूमि उपलब्ध करायी गयी है। भू-माफियाओं व बिल्डरों ने विस्थापित किसानों की भूमि पर गैरकानूनी तरीके से बहुमंजिला भवन एवं फ्लैट बना दिये हैं और उन्हें विदेशी और बाहरी लोगों को बेच जा रहे हैं। समिति की ओर से यह भी कहा गया कि यहां की बुनियादी सुविधाओं पर बाहरी लोगों का कब्जा हो गया है।
इससे ग्रामीणों की समस्या बढ़ गयी हैं। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत ने 2019 में यहां बिना अनुमति के बहुमंजिला भवनों के निर्माण पर रोक लगा दी थी। अदालत ने पिछली सुनवाई 24 मई को एक आदेश जारी कर सरकार और डीडीडीए को सभी दस्तावेजों के साथ ही वास्तविक स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिये थे।






