- बुखार, डायरिया, पीलिया समेत H1N1 और डेंगू पर विशेष निगरानी
- ज्योलिकोट के होटल-रिसॉर्ट कर्मचारियों की होगी स्क्रीनिंग
- एक और मौत का डेथ ऑडिट कराया जाएगा
हल्द्वानी। ज्योलिकोट में दूषित पेयजल प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले में बीमारी की निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था और तेज कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी नैनीताल डॉ. रश्मि पंत ने बताया कि इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम (IDSP) और इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) के तहत बुखार, डायरिया, पीलिया, उल्टी-दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोजाना रिपोर्टिंग की जा रही है। ज्योलिकोट की घटना के बाद सर्विलांस को और इंटेंसिफाई किया गया है, ताकि किसी भी क्षेत्र में बीमारी के मामलों का क्लस्टर सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग तत्काल कार्रवाई कर सके। सीएमओ ने बताया कि जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल के नेतृत्व में टीम प्रतिदिन प्राप्त होने वाले मामलों की निगरानी कर रही है। किसी गांव या क्षेत्र में एक साथ बीमारी के अधिक मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें तत्काल मौके पर भेजी जा रही हैं और आवश्यक निरोधात्मक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि तराई क्षेत्र के मोटाहल्दू, कालाढूंगी और रामनगर के अलावा हल्द्वानी के बनभूलपुरा, गौलापार और आसपास के उन क्षेत्रों में भी सर्विलांस बढ़ाया गया है, जहां पहले बुखार अथवा अन्य बीमारियों के अधिक मामले सामने आए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की आशा, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य स्तर की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में कैंप कर रही हैं। मेडिकल ऑफिसरों को भी कैंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इन कैंपों में बुखार और पीलिया के साथ-साथ H1N1, सीजनल फ्लू, डायरिया, डेंगू और अन्य जलजनित एवं वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सीएमओ ने लोगों से साफ-सफाई और बीमारी से बचाव के उपायों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें और घरों की जालियां बंद रखें। जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करने तथा आवश्यकतानुसार पानी को उबालकर पीने पर भी जोर दिया गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग और आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों के बीच हैंडवॉशिंग की प्रक्रिया को बढ़ावा देने, परिसर की साफ-सफाई बनाए रखने और क्लोरीनेशन पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध किया है। बीएड, नर्सिंग कॉलेजों समेत अन्य संस्थानों में भी स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों पर ध्यान देने को कहा गया है। ज्योलिकोट क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने होटल, होमस्टे और रिसॉर्ट में कार्यरत कर्मचारियों का विवरण भी मांगा है। सीएमओ के अनुसार कर्मचारियों की सूची के आधार पर उनकी स्क्रीनिंग कराई जाएगी, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण या बीमारी के मामले की समय रहते पहचान की जा सके।

पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी में जल संस्थान से भी सहयोग लिया जा रहा है। सीएमओ ने बताया कि पानी के नमूनों की टेस्टिंग कराई जा रही है और यदि किसी स्थान पर पानी की गुणवत्ता से संबंधित समस्या सामने आती है तो वहां स्वास्थ्य विभाग की टीम को तत्काल सक्रिय किया जाएगा। वहीं, ज्योलिकोट प्रकरण में हाल में हुई एक और मौत को लेकर सीएमओ ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। उनके अनुसार मृतक के शराब सेवन से संबंधित जानकारी भी सामने आई है और इस पहलू को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति पहले स्थानीय चिकित्सा इकाई में उपचार के लिए आया था और बाद में बीडी पांडे अस्पताल पहुंचने पर उसे तत्काल सुशीला तिवारी अस्पताल, हल्द्वानी रेफर किया गया था, जहां उसका उपचार किया गया। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि मौत का वास्तविक कारण अभी अंतिम रूप से नहीं बताया जा सकता। इसके लिए डेथ ऑडिट कराया जाएगा और समिति की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत किन परिस्थितियों और किस कारण से हुई। उन्होंने कहा कि ज्योलिकोट प्रकरण को स्वास्थ्य विभाग गंभीरता से ले रहा है और निगरानी, जांच तथा उपचार की व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
