- भगत सिंह कोश्यारी बोले—भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित शिक्षा से जोड़ना समय की जरूरत
- कुलपति ने गिनाईं विश्वविद्यालय की उपलब्धियां
हल्द्वानी। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शनिवार को अपना 21वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी मुख्य अतिथि रहे। इस दौरान विश्वविद्यालय की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सात कार्मिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संगीत विभाग के शिक्षार्थियों की समूहगान, शास्त्रीय संगीत और उत्तराखंड के लोकगीतों की प्रस्तुतियों के साथ हुआ। योग विभाग के विद्यार्थियों ने भी आकर्षक योग प्रदर्शन किया। इसके बाद अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि भगत सिंह कोश्यारी ने विश्वविद्यालय को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को कौशल आधारित पाठ्यक्रमों से जोड़ना जरूरी है।

शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिसमें ज्ञान, कौशल और जीवनोपयोगी दक्षताओं का समन्वय हो। विशिष्ट अतिथि एवं पूर्व कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अम्बरीश कुमार महाजन ने भी विश्वविद्यालय की विकास यात्रा और मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के महत्व पर विचार रखे। समारोह में हेम चन्द्र छिम्वाल, विनोद बिरखानी, कंचन बिष्ट, अनिल नैलवाल, मोहन चन्द्र पांडे, चन्द्रशेखर सुयाल और व्यास सिंह को विश्वविद्यालय के विकास में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी ने प्रवेश संख्या में वृद्धि, अध्ययन सामग्री वितरण में सुधार, परीक्षाओं के समयबद्ध आयोजन और मात्र 20 दिनों में परीक्षा परिणाम घोषित करने जैसी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने दीक्षारंभ कार्यक्रम और सामुदायिक रेडियो ‘हैलो हल्द्वानी 91.2 एफएम’ सहित डिजिटल माध्यमों से शिक्षार्थियों तक शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने की पहल का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अधिकारी, प्राध्यापक, कर्मचारी, शोधार्थी और बड़ी संख्या में शिक्षार्थी मौजूद रहे।
