- इकराम अली की शिकायत पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम हल्द्वानी का आदेश
- पहचान का कथित दुरुपयोग कर ऑनलाइन आवेदन करने के मामले में पुलिस करेगी जांच
हल्द्वानी। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए कथित तौर पर फर्जी तरीके से Form-7 दाखिल किए जाने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम, हल्द्वानी ने थाना बनभूलपुरा पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को पुलिस जांच योग्य मानते हुए प्रार्थी इकराम अली की धारा 175(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत दाखिल अर्जी स्वीकार कर ली। अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र के अनुसार, वार्ड नंबर 31 इन्द्रानगर निवासी इकराम अली वर्तमान SIR प्रक्रिया में अपने बूथ पर BLA-2 के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार 20 अगस्त 2026 को उन्हें जानकारी मिली कि निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 12 अगस्त को भाग संख्या 134 के कुल 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल करते हुए ऑनलाइन Form-7 दाखिल किए गए हैं। इकराम अली का कहना था कि उन्होंने न तो किसी मतदाता के संबंध में Form-7 दाखिल किया और न ही किसी अन्य व्यक्ति को अपने नाम से ऐसा आवेदन करने के लिए अधिकृत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों ने उनकी पहचान का कथित रूप से दुरुपयोग कर कूटरचित आईडी के जरिए खुद को उनके रूप में प्रस्तुत करते हुए निर्वाचन कार्यालय में आवेदन किए।

प्रार्थी के अनुसार, मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद 24 अगस्त को थाना बनभूलपुरा को स्पीड पोस्ट के माध्यम से लिखित शिकायत भेजी गई, जो 27 अगस्त को थाने में प्राप्त हुई। कार्रवाई न होने पर 29 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को भी शिकायत भेजी गई, जो 31 अगस्त को प्राप्त हुई। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं होने पर इकराम अली ने 15 सितंबर को न्यायालय में धारा 175(3) BNSS के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। मामले में थाना बनभूलपुरा से आख्या भी तलब की गई थी। पुलिस की ओर से दी गई आख्या में शिकायत को SIR-Form-7 से संबंधित बताते हुए कहा गया था कि शिकायतकर्ता संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन से संबंधित यह उपचार और कथित अपराध की पुलिस जांच दो अलग-अलग विषय हैं। न्यायालय ने माना कि कथित फर्जी आवेदन में इस्तेमाल User ID/Login, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ई-मेल, OTP, प्रमाणीकरण विवरण, IP Address और संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जानकारी हासिल कर अज्ञात आरोपियों की पहचान करना पुलिस विवेचना के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से संभव है।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया किसी अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा इकराम अली की पहचान का कथित दुरुपयोग करते हुए निर्वाचन संबंधी सरकारी प्रक्रिया में उनके नाम से आवेदन प्रस्तुत करना संज्ञेय अपराध की परिधि में आता प्रतीत होता है। हालांकि, कौन-कौन सी धाराएं लागू होंगी, इसका निर्धारण विवेचना अधिकारी पर छोड़ा गया है। यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शुभांगी गुप्ता ने 6 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी करते हुए थाना बनभूलपुरा के भार साधक अधिकारी को इकराम अली की 24 अगस्त की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने और मामले की विधि के अनुसार विवेचना करने के निर्देश दिए। आदेश की प्रति तत्काल संबंधित थानाध्यक्ष को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। मामले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि कथित तौर पर 28 अन्य मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली से हटवाने का प्रयास किया गया है। अब पुलिस जांच के दौरान फर्जी Form-7 किसने दाखिल किए, किस User ID या माध्यम का इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं, इन बिंदुओं की जांच की जाएगी। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट मनीष कुमार पांडे, एडवोकेट दानिश हुसैन, एडवोकेट आसिफ कुरैशी, एडवोकेट ज़मीर सैफी ने पैरवी की।
