स्टाइपेंड की मांग पर इंटर्न और पीजी डॉक्टरों का प्रदर्शन, सीएम से मिलने पहुंचे फिर भी नहीं हो पाई मुलाकात

  • ₹30 हजार स्टाइपेंड की मांग पर इंटर्न और ₹1 लाख की मांग पर पीजी डॉक्टर हड़ताल पर
  • प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मिलने की कोशिश की, डॉक्टरों ने धमकाने का लगाया आरोप

हल्द्वानी। सुशीला तिवारी अस्पताल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। चार दिन से इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जबकि पीजी डॉक्टरों ने भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। गुरुवार को दोनों वर्गों के डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात के लिए पहुंचा, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उन्हें मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने से रोका गया और धमकाया भी गया। पीजी डॉक्टरों की मुख्य मांग एमडी/एमएस रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बढ़ाकर न्यूनतम ₹1 लाख प्रतिमाह करने की है। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि वे विशेषज्ञ चिकित्सा प्रशिक्षण के साथ अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, ऑपरेशन थिएटर, नाइट ड्यूटी और ऑन-कॉल सेवाओं के साथ मरीजों की लगातार निगरानी और अन्य चिकित्सकीय जिम्मेदारियां भी उनके कार्य का हिस्सा हैं।रेजिडेंट डॉक्टरों के अनुसार वर्तमान में उन्हें करीब ₹69,820 प्रतिमाह स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि एमडी/एमएस की पढ़ाई और रहने-खाने समेत अन्य शैक्षणिक खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। उनका दावा है कि कई राज्यों में पीजी डॉक्टरों को उत्तराखंड की तुलना में अधिक स्टाइपेंड मिल रहा है। इसी अंतर को खत्म करने और महंगाई के अनुरूप स्टाइपेंड में नियमित संशोधन की व्यवस्था बनाने की मांग की जा रही है।

वहीं, एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर ₹17 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड करने की मांग पर अड़े हैं। इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच वर्तमान स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और दैनिक खर्चों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि अस्पताल की ओपीडी, आईपीडी, वार्ड और इमरजेंसी सहित विभिन्न सेवाओं में इंटर्न महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए उनके योगदान के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए। इंटर्न डॉक्टरों ने अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड में कम स्टाइपेंड होने का मुद्दा भी उठाया है। साथ ही भविष्य में महंगाई और अन्य आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप स्टाइपेंड के नियमित एवं समयबद्ध पुनरीक्षण की व्यवस्था की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर शासन, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार प्रतिनिधित्व किया है। उनका दावा है कि अब आंदोलन को व्यापक स्तर पर उठाया जा रहा है और सरकार से दोनों वर्गों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। इंटर्न और पीजी डॉक्टरों की हड़ताल के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है तथा उनका उद्देश्य स्वास्थ्य व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि अपने श्रम, जिम्मेदारी और सेवाओं के अनुरूप उचित स्टाइपेंड हासिल करना है। अब नजर सरकार की ओर से होने वाली अगली पहल पर है।

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